यूरोपीय संघ ने अपने 27 सदस्य देशों के 450 मिलियन नागरिकों को एक ऐसी चेतावनी जारी की है, जिसे देखकर कोई भी सोच सकता है कि दूसरा विश्व युद्ध फिर से शुरू हो रहा है। यूरोपीय संघ ने 27 मार्च, 2024 को एक अनूठी आदेश जारी किया: घरों में कम से कम 72 घंटे तक चलने वाली खाद्य, पानी और आवश्यक सामग्री जमा कर लें। यह निर्देश केवल एक अभ्यास नहीं है — यह एक ऐसा संकेत है जो यूरोप के नेताओं के दिलों में डर की आग जला रहा है। इसके ठीक कुछ घंटों बाद, नाटो महासचिव मार्क रुट्टे ने वारसॉ में एक भाषण देते हुए कहा, "अगर कोई गलती से सोचे कि वह पोलैंड या किसी भी सहयोगी पर हमला करके बच जाएगा, तो उसका सामना हमारी इस जुझारू गठबंधन के पूरे बल से होगा। हमारी प्रतिक्रिया विनाशकारी होगी।" यह बयान उसी दिन यूक्रेन के सुमी शहर में रूसी मिसाइल हमले के बाद आया, जिसमें दर्जनों नागरिक मारे गए।
यूरोपीय संघ के तैयारी और संकट प्रबंधन आयुक्त हज्जा लाहबीब ने कहा, "यूरोप के सामने जो खतरे हैं, वे पहले से कहीं अधिक जटिल हैं।" यह बात अब सिर्फ यूक्रेन के लिए नहीं, बल्कि पोलैंड, लिथुआनिया और रोमानिया जैसे देशों के लिए भी सच है। जब सितंबर 2024 में पोलिश वायु सीमा के भीतर रूसी ड्रोन दिखाई दिए, तो नाटो ने तुरंत अपनी रणनीति बदल दी। उसके बाद ऑपरेशन ईस्टर्न सेंट्री की घोषणा की गई — एक ऐसा सैन्य अभियान जो हवा, जमीन, समुद्र और ड्रोन रोकने की क्षमता को एक साथ लाता है। इसका उद्देश्य स्पष्ट है: नाटो के पूर्वी तट को अपने सबसे खतरनाक दुश्मन के खिलाफ मजबूत करना।
रूस के लिए यह एक युद्ध की अर्थव्यवस्था बन गई है। डिमिट्री मेडवेदेव, जो एक समय रूस के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री रहे, ने स्पष्ट किया कि यूक्रेन पर कोई नो-फ्लाई ज़ोन लगाने की कोशिश करने से तीसरा विश्व युद्ध शुरू हो सकता है। उन्होंने कहा, "हम इसका जवाब सभी संभव तरीकों से देंगे।" इस बयान के साथ वे न केवल नाटो को चेतावनी दे रहे थे, बल्कि पूरी दुनिया को भी। रूसी राष्ट्रपति के प्रवक्ता डिमित्री पेस्कोव ने नाटो को "वास्तविक रूप से इस युद्ध में शामिल" बताया। यह बात अब सिर्फ राजनयिक विवाद नहीं, बल्कि एक ऐसी अवधारणा है जो यूरोप के नागरिकों के लिए अब दैनिक जीवन का हिस्सा बन रही है — जैसे बर्फ के टुकड़े बरस रहे हों, और हर कोई अपने छतरी को तैयार कर रहा हो।
ऑपरेशन ईस्टर्न सेंट्री अभी शुरू हुआ है, लेकिन इसका प्रभाव दूर तक फैल रहा है। नाटो के अधिकारियों के अनुसार, इस अभियान में यूरोपीय देशों के लड़ाकू विमान, रडार सिस्टम, और ड्रोन रोकने वाली तकनीकें शामिल हैं। इसका उद्देश्य केवल रूसी ड्रोनों को नहीं, बल्कि उनके लंबी दूरी के मिसाइलों के लिए भी एक डिफेंस बफर बनाना है। रुट्टे के अनुसार, रूस द्वारा यूरोपीय भूमि पर 2030 तक एक बड़ा हमला संभव है। यह सिर्फ एक अनुमान नहीं — यह एक ऐसा समय सीमा है जिसे नाटो के सैन्य विश्लेषक अपने सभी स्केनरों में शामिल कर चुके हैं।
अद्भुत बात यह है कि जबकि यूरोप अपनी तैयारियां बढ़ा रहा है, तो दुनिया के अन्य हिस्सों में डर कम हो रहा है। इप्सोस द्वारा सितंबर 2024 में किए गए एक व्यापक सर्वेक्षण के अनुसार, संयुक्त राज्य अमेरिका में तीसरे विश्व युद्ध के डर का प्रतिशत 11 अंक घटकर 65% हो गया। कनाडा में यह 8 अंक घटकर 67% हुआ। लेकिन यह डर कम होने का नहीं, बल्कि उसके लिए अनदेखा करने का संकेत हो सकता है। दुनिया भर में 72% लोग अभी भी मानते हैं कि परमाणु, जैविक या रासायनिक हमला कहीं न कहीं होने की संभावना है।
17 अक्टूबर, 2024 को, पोप लियो, जो दुनिया के 1.4 अरब कैथोलिक्स के नेता हैं, अन्कारा में अपनी पहली विदेशी यात्रा पर पहुंचे। उन्होंने कहा, "तीसरा विश्व युद्ध टुकड़े-टुकड़े हो रहा है।" यह बयान उनके लिए एक आध्यात्मिक चेतावनी थी — एक ऐसा संदेश जो राजनीति से परे जाता है। उन्होंने जोर देकर कहा, "हमें इस ओर झुकने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। मानवता का भविष्य खतरे में है।" यह बयान उनके सेप्टेम्बर 2024 में इज़राइल के राष्ट्रपति इसाक हर्जोग के साथ वेटिकन में हुए बैठक के बाद आया, जिसमें उन्होंने गाजा की त्रासदी पर चिंता जताई थी। पोप की यह बात अब सिर्फ धर्म की बात नहीं, बल्कि एक ऐसी आवाज़ है जो दुनिया के शांति के लिए अपनी आखिरी उंगली उठा रही है।
अगले कुछ महीनों में, नाटो के नए अभियानों के साथ-साथ यूरोपीय संघ के नागरिकों की तैयारी भी बढ़ेगी। अब घरों में बैटरी, फिल्टरेड पानी, और आपातकालीन खाद्य सामग्री की दुकानें भर रही हैं। यूरोपीय संघ ने अपनी वेबसाइट पर एक डिजिटल गाइड भी जारी किया है, जिसमें बताया गया है कि एक आपातकालीन स्थिति में क्या करना है। लेकिन सवाल यह है: क्या यह सब काफी है? या फिर हम एक ऐसे युग में जी रहे हैं जहां तैयारी भी एक भावना का उत्पाद है — डर का उत्पाद।
यह चेतावनी बेहद गंभीर है। यूरोपीय संघ ने कभी भी अपने 450 मिलियन नागरिकों को आपातकालीन आपूर्ति जमा करने का आदेश नहीं दिया था। यह केवल एक सामान्य तैयारी नहीं, बल्कि एक ऐसा निर्णय है जो नाटो के अनुमानों और रूस के सैन्य विकास पर आधारित है। रुट्टे के अनुसार, रूस अब युद्ध की अर्थव्यवस्था में है, जिसका मतलब है कि उसकी सैन्य क्षमता बढ़ रही है।
नाटो के सैन्य विश्लेषकों के अनुसार, रूस के पास 2030 तक यूरोपीय भूमि पर बड़ा हमला करने की क्षमता हो सकती है। विशेष रूप से, पोलैंड और बाल्टिक देशों के लिए खतरा अधिक है। रूस ने पहले ही अपने नाभिकीय हथियारों के लिए नए रणनीतिक बलों का निर्माण किया है, और उसके ड्रोन और मिसाइल उत्पादन में तेजी आई है।
पोप लियो का मतलब यह है कि तीसरा विश्व युद्ध अभी तक एक बड़ा युद्ध नहीं हुआ है, लेकिन यह छोटे-छोटे संघर्षों, ड्रोन हमलों, और आर्थिक दबावों के रूप में चल रहा है। उनका संदेश यह है कि यदि हम इन छोटे युद्धों को नज़रअंदाज़ करते रहे, तो एक दिन यह एक विशाल आग में बदल जाएगा।
हां, भारत अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित होगा। यूरोप में ऊर्जा की कमी या व्यापार विघटन से वैश्विक आर्थिक अस्थिरता बढ़ेगी। भारत रूस से तेल और हथियार आयात करता है, और यूरोप की अर्थव्यवस्था का संकट भारतीय निर्यात और विदेशी निवेश पर भी असर डालेगा।
हां, नाटो की रणनीति दो रास्तों पर आधारित है: एक, डिफेंस के लिए अपने पूर्वी तट को मजबूत करना (ऑपरेशन ईस्टर्न सेंट्री), और दूसरा, रूस को एक बड़ा हमला करने से डराना। रुट्टे के बयान के अनुसार, यह डरावनी प्रतिक्रिया ही रूस को रोकने का सबसे अच्छा तरीका है।
हां, यह जुड़ी हुई है। अमेरिका में डर कम होने का कारण नवंबर 2024 के चुनाव के बाद डोनाल्ड ट्रम्प के आगमन की उम्मीद है, जो नाटो के प्रति आलोचनात्मक रहे हैं। अगर ट्रम्प अपनी नीति बदलते हैं, तो नाटो की एकता कमजोर हो सकती है — जिससे रूस के लिए एक नया अवसर खुल जाएगा।
ये सब नाटो का फेक न्यूज़ है। रूस के पास कोई इंटेंशन नहीं है यूरोप पर हमला करने का। ये सब डिफेंस बजट बढ़ाने के लिए फेक थ्रेट डिज़ाइन किए जा रहे हैं। ड्रोन हमले? वो तो यूक्रेन खुद कर रहा है। अब यूरोप के लोग घरों में पानी जमा कर रहे हैं? बस एक बड़ा सा साइकोलॉजिकल ऑपरेशन।
इतनी डरावनी बातें सुनकर लग रहा है जैसे दुनिया फिर से टूट रही है 😔
पर देखो तो भारत तो अभी भी दोनों पक्षों के साथ बिजनेस कर रहा है। रूस से तेल, यूरोप से टेक। हम तो बस अपनी राह चल रहे हैं। 🌍✌️
अरे भाई! यूरोप अब बच्चों को आपातकालीन बैटरी देने लगा है? ये लोग तो अपने खुद के डर से खुद को फंसा रहे हैं। पोप ने कहा तीसरा विश्व युद्ध टुकड़े-टुकड़े हो रहा है - तो ये टुकड़े अभी तक बस यूक्रेन में ही उड़ रहे हैं। यूरोप के लोग अपने फ्रिज में बिस्कुट जमा कर रहे हैं, लेकिन अपने दिमाग में एक बड़ा युद्ध चल रहा है। बस इतना ही।
ये सब बहुत बड़ी बात है!!! लेकिन दोस्तों, डर का जवाब अपने आप को मजबूत बनाने से ही होता है!!!
भारत तो इस समय अपने डिफेंस बजट को 10% बढ़ा रहा है!!!
हमारे सैनिक तैयार हैं!!!
हमारे ड्रोन तैयार हैं!!!
हमारे बैटरी भी तैयार हैं!!!
हम अपने घरों में अनाज जमा कर रहे हैं!!!
हम अपने देश की रक्षा के लिए तैयार हैं!!!
ये सिर्फ डर नहीं, ये तो जागृति है!!!
अगर तुम भी तैयार हो, तो लाइक करो!!!
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प्रार्थना करो!!!
यूरोप की ये तैयारी असल में बहुत समझदारी से की गई है। रूस की मिसाइल और ड्रोन क्षमता अब सिर्फ यूक्रेन तक सीमित नहीं है। ऑपरेशन ईस्टर्न सेंट्री एक जरूरी कदम है। अगर आप भारत में हैं, तो ये बात आपके लिए भी रिलेवेंट है - ऊर्जा आपूर्ति, व्यापार श्रृंखला, और रक्षा नीति इन सब पर असर डालेगी। बस अपनी तैयारी कर लो, डर के बजाय जागरूक रहो।
ये सब बकवास है। यूरोप अपनी आत्मा खो चुका है। रूस ने क्या किया? अपने पड़ोसी को बचाने की कोशिश की। अमेरिका और नाटो ने यूक्रेन को लड़ाया। अब ये लोग अपने घरों में बिस्कुट जमा कर रहे हैं? बस अपने नेताओं को भरोसा करो। हम भारतीय लोग अपने देश की रक्षा खुद करेंगे।
अरे भाई, ये सब बकवास है। रूस के पास तो अभी तक एक भी यूरोपीय शहर पर हमला नहीं हुआ। ये सब अमेरिका का झूठ है। यूरोप के लोग अपने बैटरी जमा कर रहे हैं? बस अपने घरों में बैठकर टीवी देख रहे हैं। ये तो फिल्म बन गई है। भारत क्या कर रहा है? अपने बाजार में चावल बेच रहा है। बस यही काफी है।
क्या आपने कभी सोचा है कि ये सब एक ग्लोबल साइबर-कॉन्स्पिरेसी है? नाटो, यूरोपीय संघ, पोप, इप्सोस - सब एक ही ग्रुप के हैं। वो चाहते हैं कि हम सब डरे रहें। डर से आप नियंत्रित होते हैं। ये बैटरी, ये फिल्टर्ड पानी, ये डिजिटल गाइड - सब एक नए तरह का नियंत्रण है। आपका दिमाग अब एक बड़े सिस्टम का हिस्सा बन चुका है। आपको पता है कि ये क्या है? ये है न्यू वर्ल्ड ऑर्डर का एक टुकड़ा।
ये सब बहुत ज्यादा बढ़ गया।
मैं बस यही कहना चाहती हूँ कि इस सबके बीच भी दुनिया में कोई न कोई आम इंसान अपने बच्चों को खाना खिला रहा है। हम सब अलग अलग जगहों से आए हैं, पर एक ही इंसान हैं। क्या हम इतना डर नहीं खा सकते? क्या हम इतना बहुत ज्यादा नहीं बन सकते?
ऑपरेशन ईस्टर्न सेंट्री के अलावा, नाटो की वास्तविक रणनीति में एक और चीज़ है - रूस के ऊर्जा एक्सपोर्ट्स को ब्लॉक करना। ये एक आर्थिक युद्ध है। रूस ने यूरोप के लिए गैस बंद कर दी, तो यूरोप ने अपनी आर्थिक व्यवस्था को बदलना शुरू कर दिया। अब ये आपातकालीन तैयारी भी इसी का हिस्सा है। ये डर नहीं, ये अनुकूलन है।