जब किसी प्रोफेसर के निधन की खबर मिलती है तो भावनाएँ तेज़ हो जाती हैं और जानकारी की जल्दी होती है। आप पहली बात यह करें कि खबर की पुष्टि करें — यूनिवर्सिटी की आधिकारिक पोस्टिंग, कॉलेज प्रशासन, परिवार का बयान या भरोसेमंद समाचार स्रोत देखें। बिना पुष्टि के संदेश या पोस्ट शेयर करने से परिवार और छात्रों को गलत सूचनाएँ मिल सकती हैं।
क्या आप रिश्तेदार हैं, साथ पढ़ते-लिखते थे या सिर्फ जानकरी के लिए उत्सुक? स्थिति के हिसाब से काम करें। अगर आप परिवार के पास पहुँचना चाहते हैं तो पहले प्रशासन या आधिकारिक नंबर से समय और स्थान की पुष्टि करें। सोशल मीडिया पर शेयर करने से पहले चार सवाल पूछें: क्या स्रोत विश्वसनीय है? क्या जानकारी स्पष्ट है (दिन, समय, कारण)? क्या परिवार ने सार्वजनिक बयान दिया? क्या इससे किसी की भावनाएँ ठेस पहुँच सकती हैं?
छात्रों के लिए सुझाव — अगर प्रोफेसर आपके गाइड थे तो क्लासिक कामों और असाइनमेंट्स की जिम्मेदारी किसने संभाली है, यह जानें। विभाग से संपर्क कर अगले कदम और परीक्षा/विषय संबंधी बदलावों की जानकारी लें।
परिवार और संस्थान के लिए जरूरी प्रशासनिक कदम अलग होते हैं — मृत्युदेशन का प्रमाण पत्र, सेवा रिकॉर्ड, पेंशन और प्रोविडेंट फंड के दस्तावेज़। परिवार को सलाह दें कि कॉलेज के HR/administration से शीघ्र संपर्क करें ताकि प्रोसेस तेज़ हो। यदि आप संस्था के प्रतिनिधि हैं तो अभिलेखों की प्रति, अंतिम सेवाकाल और शोध/प्रकाशनों की सूची तैयार रखें।
अख़बार या वेबसाइट पर खबर प्रकाशित करने वाले रिपोर्टर अक्सर इन बातों की जांच करते हैं: आधिकारिक बयान, अस्पताल या पुलिस रिपोर्ट, परिवार का संपर्क और साक्ष्य (जैसे पोस्टिंग)। पाठक के तौर पर आप ऐसे ही स्रोतों की मांग कर सकते हैं जब खबर अस्पष्ट लगे।
क्या आप श्रद्धांजलि देना चाहते हैं? शोक संदेश लिखते समय छोटा और स्पष्ट रखें: नाम, आपके साथ का रिश्ता और एक सच्चा वाक्य जो प्रोफेसर की अहमियत बताए। लंबे शब्दों से बचें। अगर परिवार ने दान या पुष्टिकरण की बात कही है तो उसी के अनुसार योगदान दें।
प्रोफेसर की शैक्षणिक विरासत कैसे सुरक्षित रखी जाए? उनके शोध-पत्र, नोट्स और पुस्तकें विभाग के डिजिटल आर्काइव में रखें या परिवार की अनुमति से जर्नल/लाइब्रेरी को सौंपें। छात्र उनकी लैक्चर नोट्स और यादों को संकलित कर सकते हैं — यह अगली पीढ़ी के लिए उपयोगी होगा।
अगर आपको साइट पर खबर भेजनी है तो भरोसेमंद स्रोत की प्रति और संपर्क विवरण साझा करें, ताकि रिपोर्टिंग तेज़ और सही हो। संवेदनशील खबरों में समय की चाहत के साथ सत्यापन ज़रूरी है — इससे परिवार का सम्मान भी बना रहता है और पाठकों को सही जानकारी मिलती है।
कोई सवाल है या किसी प्रोफेसर से जुड़ी ख़ास जानकारी चाहिए? कमेंट में बताइए या आधिकारिक विभाग से संपर्क करिए — हम भी भरोसेमंद अपडेट लाने की कोशिश करेंगे।
दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर जी एन साईबाबा का 57 वर्ष की उम्र में हैदराबाद में निधन हो गया। वह दिल का दौरा पड़ने से चल बसे। साईबाबा का पिछले 10 दिनों से अस्पताल में इलाज चल रहा था। वर्ष 2014 में माओवादी संबंधों के संदेह में उनकी गिरफ्तारी की गई थी। 2024 में बॉम्बे हाई कोर्ट ने उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया था।