भूस्खलन: क्या है, कैसे पहचाने और क्या करें

भूस्खलन अचानक मिट्टी, पत्थर या मलबा के ढलान से गिरना होता है। खासकर मॉनसून के दौरान या भूकंप के बाद पहाड़ी और झरझरा इलाकों में यह खतरनाक बन जाता है। अगर आप पहाड़ी इलाके, पश्चिमी घाट या पूर्वोत्तर के पास रहते हैं तो यह जानकारी तुरंत काम आएगी।

सबसे पहले ध्यान रखें: चेतावनी संकेत पहचानना ही बचाव की पहली सीढ़ी है। जमीन पर दरारें, दीवारों या फर्श में झुकाव, झरते पानी का असामान्य बहाव, झुकते या झुसटते पेड़, और ढलान से छोटे-छोटे पत्थर गिरना—ये सभी पहले संकेत हो सकते हैं। अगर आप इनमें से कोई देखते हैं तो तुरंत आसपास के लोगों को सूचना दें।

फौरन करने योग्य काम (लैंडस्लाइड के दौरान)

अगर भूस्खलन शुरू हो गया है तो घबराइए नहीं, तेज और समझदारी से काम करें। सबसे पहले ऊपर की ओर (ऊँचाई की दिशा) या साइडवेज़ जाएँ—सीधे नीचे भागना खतरनाक हो सकता है। खुले स्थान की ओर जाएँ, पेड़ों के पीछे या निचले इलाके में न जाएँ। अपने सिर और छाती को हाथों से ढकें और अगर कार में हैं तो धीरे-धीरे बाहर निकलकर ऊंचे स्थान पर जाएँ।

अगर रोपवे, नালা या नदी के पास हैं तो तुरंत किनारे छोड़ दें—भूस्खलन से पानी का रास्ता बदल सकता है। मोबाइल फोन को चार्ज रखें, कम रोशनी में फ्लैशलाइट और जरूरी दस्तावेज साथ रखें। आपकी प्राथमिकता स्वयं और अपने निकटतम लोगों की सुरक्षा होनी चाहिए।

भूस्खलन के बाद क्या करें

भूस्खलन थमने के बाद सबसे पहले घायल लोगों की मदद करें और आपात सेवा (लोकल प्रशासन, पुलिस, और आपदा प्रबंधन) को सूचना दें। गैस और बिजली की लाइनों की जाँच करें—अगर रिसाव लगे तो तुरंत बंद कराएँ। घर की संरचना टूट-फूट हो तो अंदर न लौटें जब तक इंजीनियर ने सुरक्षित न बताया।

पानी की आपूर्ति दूषित हो सकती है—उबाल कर पीएँ या बोतलबंद पानी इस्तेमाल करें। फोटो और वीडियो से नुकसान रिकॉर्ड करें; यह बीमा या राहत के काम आएगा। पड़ोसियों, खासकर बुजुर्ग और बच्चों की मदद करें और स्थानीय राहत केंद्र में जानकारी दें।

रोकथाम के उपाय जरूरी हैं: ढलानों पर वृक्षारोपण बढ़ाएँ, तटबंध और ड्रेनेज ठीक रखें, अवैध कटाई न करें, और निर्माण के समय भू-वैज्ञानिक सलाह लें। सामुदायिक स्तर पर मॉनसून से पहले निगरानी, अलर्ट सिस्टम और आपात अभ्यास रखें।

भारत में उत्तराखंड, हिमाचल, सिक्किम, अरुणाचल, मेघालय, केरल और पश्चिमी घाट जैसे हिस्से भूस्खलन के लिए संवेदनशील हैं। मौसम विभाग और स्थानीय प्रशासन के अलर्ट पर तुरंत ध्यान दें—एक छोटी सी चेतावनी भी जान बचा सकती है।

अगर आप यात्रा पर हैं और जोखिम वाले इलाके से गुजर रहे हैं तो ड्राइव धीमी रखें, बारिश में कटिंग वाले रास्ते से होशियार रहें और स्थानीय सलाह मानें। सुरक्षा साधारण कदमों से बनती है—सावधान रहें, संकेत पहचानें और समय पर तय निर्णय लें।

पापुआ न्यू गिनी में विनाशकारी भूस्खलन में 2000 से अधिक लोग दबे

पापुआ न्यू गिनी के एंगा प्रांत में पहाड़ी गांव में भूस्खलन से 2,000 से अधिक लोग दब गए हैं। इस घटना में घरों, खाद्यान्न उद्यानों और आर्थिक संरचना को भारी क्षति पहुंची है। ग्रामीण और बचाव दल संकट में हैं। बचाव कार्य के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहायता मांगी गई है।

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