क्या आपने कभी सोचा कि कुछ कामों के लिए समय सचमुच फर्क डालता है? शादी, गृह प्रवेश या नया कारोबार शुरू करना — इन सबमें सही शुभ मुहूर्त से तनाव कम होता है और परिवार का मन भी शांत रहता है। यहां मैं सरल भाषा में बताता/बताती हूँ कि मुहूर्त क्या है, कैसे देखें और तुरंत अपनाने लायक टिप्स क्या हैं।
मुहूर्त पंचांग के चार मुख्य अंगों पर निर्भर करता है: तिथि, नक्षत्र, योग और करण। इसके साथ लग्न और चंद्रमा की स्थिति भी मायने रखती है। खाली शब्दों में नहीं — हर एक घटक इस बात का संकेत देता है कि किसी काम के लिए दिन और समय अनुकूल है या नहीं।
राहु काल, गुलिका और ग्रहणकाल को भी नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। अगर किसी खास समय में राहु काल पड़ रहा है या चंद्र ग्रहण है, तो सामान्यत: महत्वपूर्ण कर्म जैसे विवाह, ग्रह प्रवेश या भूमि पूजन टाला जाता है।
1) सबसे पहले अपने काम की श्रेणी तय करें — विवाह, नामकरण, गृह प्रवेश, व्यवसाय शुरूआत आदि। अलग काम के लिए अलग नियम होते हैं।
2) स्थानीय पंचांग देखें — आज की तिथि, नक्षत्र, योग और करण चेक करें।
3) लग्न और चंद्र की स्थिति पर ध्यान दें। शादी जैसे काम में लाभदायक लग्न चाहिए और चंद्रमा शांत होना चाहिए।
4) राहु काल और ग्रहण जाँचें। इन समयों में बड़े आयोजन टालें।
5) अगर दो तारीखें संभावित हैं तो व्यवहारिक पक्ष देखें — मेहमानों की उपलब्धता, मौसम, स्थल। मुहूर्त के साथ ये चीजें भी बराबर मायने रखती हैं।
उदाहरण के तौर पर: अगर एक दिन पंचांग के हिसाब से अच्छा है लेकिन उसी दिन अधिकांश मेहमान दूर हैं, तो दूसरे दिन का मुहूर्त लेना बेहतर रहेगा — क्योंकि असल खुशी लोगों के साथ मनाने में है।
ऑनलाइन टूल्स और ऐप आज तेज़ और भरोसेमंद हैं; फिर भी महत्वपूर्ण मामलों में पंडित या ज्योतिश से सलाह लेना ठीक रहता है।
त्वरित टिप्स — रोज़मर्रा के कामों के लिए
अंत में, याद रखें: मुहूर्त मदद करता है पर व्यावहारिक तैयारी और लोगों का साथ उतना ही जरूरी है। यदि आप रोज़ के मुहूर्त और खास अवसरों की ताज़ा जानकारी चाहते हैं, तो कला समाचार पर नियमित अपडेट देख सकते हैं — ताकि आप सही समय पर सही फैसला लें।
6 जुलाई 2024 का पंचांग गुप्त नवरात्रि के प्रारंभ को दर्शाता है, जो दुर्गा मां के भक्तों के लिए महत्त्वपूर्ण है। पंचांग में तिथि, नक्षत्र, राहु काल, और हिंदू मास सहित महत्वपूर्ण जानकारी दी गई है। शुभ मुहूर्त में अभिजीत शामिल है, जबकि अशुभ मुहूर्त में दुश्ट मुहूर्त, कुलिक, कंतक, राहु काल, कालवेला, यमघंट, और यमगंडा शामिल हैं। गुप्त नवरात्रि के अनुष्ठानों और महत्ता पर भी चर्चा की जाती है।