जब बात आती है ओडीआई सीरीज, एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट सीरीज़ जिसमें दो टीमें 50 ओवर की एक पारी खेलती हैं। इसे एक दिवसीय क्रिकेट भी कहते हैं, और ये वो फॉर्मेट है जहाँ रिकॉर्ड बनते हैं, टीमें अपनी पहचान बनाती हैं, और खिलाड़ी अपनी शान दिखाते हैं। इस सीरीज़ में एक बार का मैच नहीं, बल्कि एक यात्रा होती है — जहाँ एक छक्का पूरी सीरीज़ बदल सकता है, और एक गेंद टीम की किस्मत बदल सकती है।
इस सीरीज़ के दौरान न्यूज़ीलैंड क्रिकेट, एक ऐसी टीम जो छोटी आबादी के बावजूद दुनिया की टॉप टीमों में शुमार होती है अक्सर बड़े मुकाबलों में शानदार प्रदर्शन करती है। जब बाबर आज़ाम, पाकिस्तान के नेता और एक दिवसीय क्रिकेट के सबसे सफल बल्लेबाज़ों में से एक बल्ले से जवाब देते हैं, तो पूरा मैदान उनके नाम को चिल्लाने लगता है। ऐसे ही मैचों में भारतीय क्रिकेट, एक ऐसा खेल जो देश की भावनाओं को जोड़ता है की शक्ति दिखती है — जब डीप्ति शर्मा लार्ड्स पर एक-हाथी छक्का मारती है, या नशरा संधु की हिट-विकेट ट्रेंड बन जाती है। ये सिर्फ मैच नहीं, ये इतिहास बन रहे हैं।
ओडीआई सीरीज़ में कोई बड़ा खिलाड़ी अकेला नहीं चलता। ये टीम का खेल है, रणनीति का खेल, और दबाव का खेल। कभी जॉफ्रा आर्चर एशेज़ की तैयारी में ओडीआई से बाहर हो जाता है, तो कभी पाकिस्तान वेस्ट इंडीज़ को हराकर पहला ओडीआई जीत लेता है। ये सीरीज़ न सिर्फ जीत-हार की बात करती है, बल्कि उस तरह के खिलाड़ियों की कहानियाँ भी बताती है जो बिना चमक के भी इतिहास बना देते हैं। यहाँ आपको ऐसे ही बड़े मैच, अनसुनी कहानियाँ, और वो लम्हे मिलेंगे जिन्होंने क्रिकेट की दुनिया को हिला दिया।
न्यूजीलैंड ने हैगली ओवल, क्रिस्टचर्च में डेरल मिचेल की शतक पारी के साथ वेस्टइंडीज को 7 रन से हराकर ओडीआई सीरीज में 1-0 की बढ़त बना ली।