हर दिन ऐसी खबरें आती हैं जिनमें जान जाने की सूचना होती है। ये खबरें भावुक कर देती हैं और कभी-कभी अफवाहें भी उड़ने लगती हैं। इस पेज पर आप ऐसे समाचार पाएँगे जो हम ने जांच कर पुष्टि के बाद प्रकाशित किए हैं — चाहे वह आग जैसी आपदा हो, सड़क हादसा हो या किसी व्यक्ति की मौत से जुड़ी जांच।
यहाँ आप देखेंगे: ज्वालामुखी जैसी बड़ी आपदाओं से लेकर स्थानीय हादसों तक के अपडेट। उदाहरण के तौर पर, लॉस एंजेलेस की आग में कम से कम पाँच मौतें रिपोर्ट हुईं और हजारों लोग बेघर बने — ऐसी खबरें हम स्थानीय अधिकारियों और आधिकारिक घोषणाओं के आधार पर प्रकाशित करते हैं। इसी तरह बेंगलुरु के अतुल सुभाष केस जैसी संवेदनशील खबरों में हम पुलिस रिपोर्ट और पारिवारिक दावों को अलग‑अलग दिखाते हैं ताकि पूरा संदर्भ मिले।
हर रिपोर्ट में स्रोतों को साफ लिखा जाता है: पुलिस बयान, अस्पताल रिपोर्ट, सरकारी नोटिस या परिवार के बयान — इससे आप जान सकेंगे कि कौन‑सी जानकारी आधिकारिक है और किस हिस्से पर पूछताछ चल रही है।
दुखद खबर पढ़ते समय तर्क और संवेदनशीलता दोनों ज़रूरी हैं। अगर आपको कोई कहानी परेशान करती है तो उसे तुरंत बंद कर दें और किसी विश्वसनीय स्रोत से ही आगे की जानकारी लें। सोशल मीडिया पर किसी रिपोर्ट को शेयर करने से पहले सत्यापन का ख्याल रखें — अनपुष्ट अफवाहें और परिवारों के लिए दर्द बढ़ा सकती हैं।
अगर किसी खबर में आप से जुड़े तथ्य हों या आपके पास साक्ष्य हो, तो हमें बताइए — हम जांच करेंगे। गलत सूचनाओं की रिपोर्ट करने के लिए हमारी टीम समर्पित है।
यह टैग सिर्फ मौतों की सूचनाएँ नहीं देता, बल्कि पीछे की वजहें, जांच की दिशा और समुदाय पर प्रभाव भी दिखाता है। जैसे—प्राकृतिक आपदाओं में राहत‑कार्य, दुर्घटनाओं में सुरक्षा‑कमियों की खोज और आत्महत्या मामलों में कानूनी व सामाजिक पहलुओं की रिपोर्टिंग।
आप खोज में आसान तरीके आज़मा सकते हैं: क्षेत्र (राज्य/शहर), तिथि या कीवर्ड जैसे 'आग', 'आत्महत्या', 'हादसा' डालकर सीधे संबंधित खबरें देखें। हमारी नोटिफिकेशन ऑन रखें ताकि ताज़ा अपडेट समय पर मिलें।
अगर आप किसी खबर को पढ़कर भावनात्मक रूप से परेशान महसूस कर रहे हैं, तो अपने परिवार या मित्र से बात करें, और जरूरत पड़ने पर स्थानीय हेल्थ सर्विसेज या नज़दीकी सहायता केंद्र से संपर्क करें। हम यहाँ जानकारी देते हैं, और समाज की भलाई के लिए जिम्मेदार रिपोर्टिंग करते हैं।
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बिहार में मई 2024 के अंत में भयानक हीटवेव के कारण करीब 100 लोगों की संदिग्ध मौतें हुईं, जिनमें चुनाव ड्यूटी पर तैनात 10 अधिकारी भी शामिल हैं। अस्पतालों में भारी दबाव और सरकारी तैयारियों के दावों के बीच संवेदनशील वर्गों की परेशानी और बढ़ गई।