दिसंबर 6, 2025 को क्राइस्टचर्च के हैगले ओवल में एक ऐसा पल आया जिसे क्रिकेट के इतिहास में लंबे समय तक याद किया जाएगा। वेस्ट इंडीज ने 531 रनों का लक्ष्य पूरा करने के बजाय, चौथी पारी में 457/6 बनाकर एक असंभव लगने वाली परिस्थिति में ड्रॉ बचा लिया — और इस तरह, टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में इंग्लैंड के 1939 के अमर टेस्ट के बाद सबसे बड़ा चौथी पारी स्कोर दर्ज किया। ये सिर्फ एक ड्रॉ नहीं था। ये एक बचाव था। एक आत्मविश्वास की वापसी थी।
जब वेस्ट इंडीज ने पहली पारी में सिर्फ 167 रन बनाए, तो सबने सोचा कि ये मैच तो बिल्कुल खो चुका है। न्यूजीलैंड ने 231 रन बनाए थे, और उनके बल्लेबाजों ने दूसरी पारी में 490 रन बनाकर वेस्ट इंडीज को 531 रनों का लक्ष्य दे दिया। तीन दिनों तक न्यूजीलैंड के गेंदबाजों के लिए जीत सिर्फ एक फॉर्मलिटी लग रही थी। लेकिन चौथे दिन की शुरुआत में, जब वेस्ट इंडीज 212/4 पर था और 318 रनों की जरूरत थी, तो लगा जैसे कोई नया अध्याय शुरू हो रहा है।
जस्टिन ग्रीव्स और शाई होप ने एक ऐसा साझा खेल खेला जिसे देखकर दर्शक चुप रह गए। होप ने अपना चौथा टेस्ट शतक (140 रन) पूरा किया, जबकि ग्रीव्स ने अपने करियर का सबसे बड़ा स्कोर — 202* — बनाया। दोनों ने एक दूसरे के साथ 56 रन जोड़े, लेकिन होप के आउट होने के बाद जो चीज आगे बढ़ी, वो थी अद्भुत।
तीन विकेट गिरने के बाद जब केमर रोच क्रीज पर आए, तो कोई सोच रहा था कि ये अंत हो रहा है। लेकिन रोच और ग्रीव्स ने 104 रन की अनब्रेक जोड़ी बनाई — और ये जोड़ी ने सिर्फ रन नहीं बनाए, बल्कि समय भी बर्बाद किया। वो जीत की चाहत में नहीं, बल्कि हार से बचने के लिए बल्ला घुमा रहे थे। गेंदबाजों के लिए ये एक मानसिक युद्ध बन गया।
मैच के बाद जस्टिन ग्रीव्स ने टेलीविजन के सामने कहा, "केमर, वो सीनियर प्रो, मुझे हर पल गाइड कर रहे थे।" और फिर उन्होंने अपने कोच डारेन सैमी की बात दोहराई — "जब तुम क्रीज पर आ जाओ, तो वहीं रहो।" ये बातें सिर्फ बातें नहीं थीं। ये एक टीम की मानसिकता थी।
सैमी की टीम इस सीज़न के शुरुआत में पांच लगातार हार के बाद शून्य अंक पर थी। ये मैच उनके लिए सिर्फ 6 अंकों का लाभ नहीं था — ये एक आत्मविश्वास का फिर से जन्म था। इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) ने भी इसे ऑफिशियल तौर पर पुष्टि किया: ये वेस्ट इंडीज का पहला अंक था जो उन्होंने नए वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप साइकिल में अर्जित किया।
इस ड्रॉ के बाद दोनों टीमें अब वेलिंगटन के बेसिन रिजर्व में दूसरे टेस्ट के लिए तैयार हो रही हैं। दिसंबर 10, 2025 को शुरू होने वाला ये मैच वेस्ट इंडीज के लिए एक नया अवसर है — न केवल अंक बढ़ाने का, बल्कि एक नई रूह लाने का।
न्यूजीलैंड के लिए ये ड्रॉ उनके घरेलू अजेय रिकॉर्ड को बरकरार रखता है, लेकिन ये भी सच है कि उन्होंने अपनी जीत की आस छोड़ दी। जब एक टीम चौथी पारी में 457 रन बना दे, तो बल्लेबाजी का नियम बदल जाता है।
वेस्ट इंडीज के लिए ये एक अंत नहीं, एक शुरुआत है। उनके बल्लेबाजों ने दिखाया कि वो अभी भी दुनिया के सबसे कठिन चुनौतियों का सामना कर सकते हैं। अगर ग्रीव्स और रोच इस तरह खेलते रहे, तो अगले तीन महीनों में वो वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप में वापसी कर सकते हैं।
वेस्ट इंडीज को ड्रॉ होने पर 6 अंक मिले, जो उनके नए वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप साइकिल में पहले अंक हैं। इससे पहले उन्होंने पांच मैच खो दिए थे। ये अंक उन्हें टैबल में बचाए रखते हैं और भविष्य के मैचों के लिए मानसिक लाभ देते हैं।
हाँ, ये 457/6 वेस्ट इंडीज का सबसे बड़ा चौथी पारी स्कोर है। पिछला रिकॉर्ड 1961 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 418 रन था। ये मैच उनके इतिहास का सबसे बड़ा बचाव है, खासकर जब लक्ष्य 500 से ऊपर था।
नहीं। ये ग्रीव्स का पहला टेस्ट शतक था और उनका सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय स्कोर। उनका पहले टेस्ट में सबसे अधिक स्कोर 77 था। ये प्रदर्शन उन्हें टेस्ट क्रिकेट के स्टार्स में शामिल कर देता है।
रोच एक फास्ट बॉलर हैं, जिनका औसत बल्लेबाजी स्कोर 12 से भी कम है। लेकिन इस मैच में उन्होंने 50+ रन बनाए और 104 रन की अनब्रेक जोड़ी बनाई। इससे न्यूजीलैंड के गेंदबाज थक गए और वेस्ट इंडीज के लिए समय बच गया।
नहीं। 1939 में इंग्लैंड ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टाइमलेस टेस्ट में 654/6 बनाया था। लेकिन ये एक अनंतिम मैच था। इसलिए, ग्रीव्स और रोच का ये स्कोर वास्तविक टेस्ट मैचों में सबसे बड़ा चौथी पारी स्कोर है।
अगला मैच वेलिंगटन के बेसिन रिजर्व में होगा, जहां गेंद ज्यादा घूमती है। वेस्ट इंडीज अब बल्लेबाजी की आत्मविश्वास के साथ आएगा। उनकी रणनीति अब ड्रॉ बचाने की नहीं, बल्कि जीत की ओर बढ़ने की होगी।
202*? अरे भाई ये तो बस एक बल्लेबाज की अहंकार की बात है, जब टीम ने 167 बनाए थे तो ड्रॉ बचाना ही जीत थी। अब ये सब इतिहास बनाने का शोर मचा रहे हो, पर याद रखो ये मैच तो ड्रॉ हुआ था, जीता नहीं।
अरे यार, इतना शोर क्यों? न्यूजीलैंड ने तो 490 बनाए थे, वेस्ट इंडीज ने 457 बनाए, तो फिर ये इतिहास क्या है? अगर ये इतिहास है तो भारत के 350/9 से जीत को क्या कहेंगे? सिर्फ इसलिए कि आप नहीं खोए?
ग्रीव्स 202* कर रहा है और हम इतिहास बना रहे हैं यार। ये टेस्ट क्रिकेट नहीं ये बॉलीवुड ड्रामा है। एक फास्ट बॉलर 50 बनाता है तो ये नैनोटेक्नोलॉजी है। बस इतना ही नहीं बाकी सब बोल रहे हैं जैसे वो न्यूटन बन गए।
ये मैच देखकर मैं रो पड़ा। जब तुम लगातार हारते हो और फिर एक दिन ऐसा कर देते हो कि दुनिया चुप हो जाए - ये तो असली जीत है। ग्रीव्स और रोच ने सिर्फ रन नहीं बनाए, उन्होंने टीम की आत्मा को जिंदा कर दिया। इसे इतिहास न कहो, इसे जीवन का सबक बना लो।
इस मैच में जो भी खिलाड़ी खेले, उन्होंने अपने देश की जिम्मेदारी निभाई। वेस्ट इंडीज के खिलाड़ी अक्सर अपने लिए खेलते हैं, लेकिन आज उन्होंने अपनी टीम के लिए खेला। ये बहुत बड़ी बात है।
क्या ये रिकॉर्ड है या बस एक बड़ा ड्रॉ? न्यूजीलैंड ने जीत के लिए लगातार गेंदबाजी क्यों नहीं की? ये टीम तो बस बचने के लिए खेल रही थी। अब ये इतिहास बनाने का शोर मचाना बहुत बेकार है।
इस खेल को देखकर मुझे लगा कि क्रिकेट अभी भी एक ऐसा खेल है जो मानवता की लड़ाई को दर्शाता है। जब लगता है कि सब कुछ खो चुका है, तब भी इंसान अपनी आत्मा को बचाने के लिए लड़ता है। ग्रीव्स और रोच ने इसका जीवंत उदाहरण दिया।
ये मैच तो एक दिन एक बार की बात पर खेला गया था। ग्रीव्स ने जब बल्ला उठाया तो उसके दिमाग में सिर्फ एक चीज थी - बाकी बचाना है। रोच के 50 रन बनाने का मतलब ये नहीं कि वो बल्लेबाज हो गए, बल्कि ये कि उसने टीम के लिए अपना भूमिका बदल दिया। ये टेस्ट क्रिकेट की सबसे अच्छी बात है - जब एक बॉलर बल्लेबाज बन जाए और टीम को बचा ले।
ये मैच तो एक बहुत बड़ा सांस्कृतिक घटना है। वेस्ट इंडीज के खिलाड़ी जब अपने आप को असंभव कहते हैं, तो दुनिया उन्हें असंभव बना देती है। ये नहीं कि उन्होंने जीता, बल्कि ये कि उन्होंने हार को नकार दिया। ये वो चीज है जो असली जीत है।
इस खेल को विश्लेषण करने के लिए एक व्यापक दृष्टिकोण आवश्यक है। वेस्ट इंडीज के लिए यह ड्रॉ उनके वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप में एक अत्यंत महत्वपूर्ण बिंदु है, जो उन्हें टैबल पर बनाए रखता है और भविष्य के लिए मानसिक आधार प्रदान करता है। इस तरह के अवसर बहुत कम मिलते हैं।
202*? अरे भाई ये तो बस एक बल्लेबाज की अहंकार की बात है, जब टीम ने 167 बनाए थे तो ड्रॉ बचाना ही जीत थी। अब ये सब इतिहास बनाने का शोर मचा रहे हो, पर याद रखो ये मैच तो ड्रॉ हुआ था, जीता नहीं। और फिर भी ये रिकॉर्ड बनाने का शोर - बस इतना ही नहीं, ये तो बस एक बड़ा ड्रॉ है।
ये मैच देखकर मुझे याद आया कि जब मैं छोटा था, तो मेरे पापा ने कहा था - जब तुम खेलो तो बस अपना बेस्ट दो। ग्रीव्स और रोच ने वही किया। उन्होंने डर को नहीं, बल्कि आत्मविश्वास को चुना। ये टीम को बचाने के लिए नहीं, बल्कि अपने दिल के लिए खेले। ये असली जीत है।
ये तो बस एक ड्रॉ है भाई, लेकिन इसमें जो भावना है, वो जीत से भी ज्यादा है। जब तुम लगातार हारते हो और फिर एक दिन ऐसा कर देते हो कि दुनिया चुप हो जाए - तो ये जीत है। ग्रीव्स ने अपना पहला शतक बनाया, रोच ने 50 बनाए, और टीम ने बच गए। ये तो जादू है।
202*? ये तो बस एक बल्लेबाज का अहंकार है। न्यूजीलैंड ने तो 490 बनाए थे, वेस्ट इंडीज ने 457 बनाए, तो फिर ये इतिहास क्या है? अगर ये इतिहास है तो भारत के 350/9 से जीत को क्या कहेंगे? सिर्फ इसलिए कि आप नहीं खोए?
ये टेस्ट क्रिकेट नहीं ये एक राजनीतिक बयान है। वेस्ट इंडीज ने जीत के लिए नहीं, बल्कि बचाव के लिए खेला। ये टीम ने अपनी गरिमा को बचाया, लेकिन ये जीत नहीं है। और फिर भी ये रिकॉर्ड बनाने का शोर - बस इतना ही नहीं, ये तो एक बड़ा ड्रॉ है।
ग्रीव्स का 202* बहुत अच्छा था, लेकिन रोच के 50 रन वास्तव में महत्वपूर्ण थे। एक फास्ट बॉलर जो 50 रन बनाए और 104 रन की जोड़ी बनाए - ये तो बहुत बड़ी बात है। न्यूजीलैंड के गेंदबाज थक गए, और वेस्ट इंडीज को समय मिल गया।
ये मैच देखकर मुझे लगा कि असली जीत तो वो है जब तुम हार से बच जाओ। ग्रीव्स और रोच ने अपने दिल की आवाज सुनी। उन्होंने नहीं सोचा कि जीतना है, बल्कि सोचा कि बचना है। और इसी बचाव ने टीम को नई जान दी।
जब तुम लगातार हारते हो, तो एक दिन ऐसा होता है जब तुम्हारी आत्मा बोलती है। ग्रीव्स ने बल्ला उठाया और उसने न सिर्फ रन बनाए, बल्कि अपनी टीम की आत्मा को भी बचाया। ये टेस्ट क्रिकेट का असली रूप है - न केवल रनों का खेल, बल्कि आत्मा का संग्राम।