मिसाइल रक्षा — क्या है और यह क्यों जरूरी है?

मिसाइल रक्षा का सरल मतलब है — दुश्मन की मिसाइल को टेक ऑफ़ या उससे पहले रोकना। आप सोच रहे होंगे, यह कैसे काम करता है? जवाब में चार चीजें मिलकर काम करती हैं: शुरुआती चेतावनी (सैटेलाइट/राडार), ट्रैकिंग, कमांड-और-कंट्रोल, और इंटरसेप्टर मिसाइल।

भारत की दृष्टि और प्रमुख सिस्टम

भारत की मिसाइल रक्षा रणनीति दो-স্তरीय BMD (Ballistic Missile Defence) पर आधारित है। ऊपरी परत (exo-atmospheric) इंटरसेप्टर उच्च ऊँचाई पर शत्रु के बैलिस्टिक मिसाइल को रोकने की कोशिश करता है, जबकि निचली परत (endo-atmospheric) वायुमंडल के अंदर आने पर उसे ढहाती है। यह बुनियादी ढांचा DRDO और अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने विकसित किया है।

इसके अलावा भारत ने विदेशी सिस्टम भी खरीदे हैं: रूस का S-400 लंबी दूरी की हवाई और कुछ मिसाइल खतरों के खिलाफ काम आता है; इजरायल के Barak-8 जैसे सिस्टम नौसैनिक और तटीय रक्षा मजबूत करते हैं; Akash जैसा सिस्टम मध्यम दूरी पर हवाई खतरों को टार्गेट करता है।

यह कैसे काम करता है — आसान भाषा में

सबसे पहले रडार और सैटेलाइट मिसाइल के लॉन्च को पकड़ते हैं। फिर कंप्यूटर लक्ष्य का ट्राजेक्टरी (trajectory) निकालता है और तय करता है कि कौन सा इंटरसेप्टर भेजना है। इंटरसेप्टर मिसाइल या तो निकट-विस्फोटक वारहेड से लक्ष्य नष्ट करती है, या हिट-टू-किल तकनीक से सीधे टकराती है। सीधा-सा मिलकर: देखो → ट्रैक करो → इंटरसेप्ट करो।

यहाँ एक महत्वपूर्ण बात: बैलिस्टिक मिसाइल की राह अपेक्षाकृत सीधी होती है, इसलिए इन्हें ट्रैक करना आसान रहता है। लेकिन क्रूज़ मिसाइलें और कम ऊँचाई पर उड़ने वाले ड्रोन मुश्किल बनाते हैं क्योंकि वे जमीन के पास छिपकर आते हैं।

क्या मिसाइल रक्षा पूरी तरह भरोसेमंद है? नहीं। कोई भी सिस्टम परफेक्ट नहीं होता। चुनौतियाँ हैं — मिसाइलों का मात्रा में हमला (saturation), छद्म या डमी लक्ष्य, मौसम के कारण रडार सीमाएँ, और खर्च। हर इंटरसेप्शन महंगा होता है और हर बार सफल नहीं होगा।

आपका सवाल होगा कि आम नागरिक के लिए क्या मायने रखता है? मिसाइल रक्षा जनता की सुरक्षा बढ़ाती है और रणनीतिक स्थिरता में योगदान देती है। पर साथ ही, इसे सख्त निगरानी, नियमित टेस्टिंग और इंटीग्रेटेड सिविल-डिफेंस योजनाओं की भी जरूरत होती है ताकि जोखिम कम हो और प्रतिक्रिया तेज़ हो।

अगर आप और जानना चाहते हैं तो ध्यान रखें: सिस्टम अकेले काम नहीं करते—साथ में सैटेलाइट, रडार नेटवर्क, युद्धाभ्यास और अंतरराष्ट्रीय खरीद-फरोख्त सब मिलकर रक्षा बनाते हैं। मिसाइल रक्षा एक टेक्नोलॉजी और नीति दोनों का मिश्रण है।

अंत में, मिसाइल रक्षा देश की सुरक्षा का एक अहम हिस्सा है, पर यह युद्ध को रोकने का अकेला रास्ता नहीं। बातचीत, डिप्लोमेसी और नियंत्रण समझौते भी उतने ही जरूरी हैं।

अमेरिका इज़राइल को उन्नत THAAD मिसाइल रक्षा प्रणाली भेजने पर विचार कर रहा है

अमेरिका इज़राइल को एक उन्नत एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा प्रणाली THAAD भेजने पर विचार कर रहा है ताकि ईरान के संभावित हमलों से सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। ईरान द्वारा हाल में इज़राइल पर किए गए अभूतपूर्व मिसाइल हमलों के जवाब में यह कदम उठाया जा रहा है। यह प्रणाली ऑपरेट करने के लिए अमेरिकी सैनिकों की भी आवश्यकता होगी, जिससे क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य संलिप्तता में वृद्धि होगी।

श्रेणियाँ

टैग