पार्श्व शून्य से अधिक घंटियों की आवाज़ें रुको नहीं गईं जब एक विनाशकारी 8.8 मैग्नीट्यूड भूकंपरूस के कैम्चाटका द्वीपपुंज के समुद्री तट पर कहर बरपा गया। यह झटका 29 जुलाई 2025 को देर रात हुआ, जिससे पूरे शांति सागर (Pacific Ocean) में सिर पर पानी बढ़ जाने की आहूति निकाल दी गई। स्थिति इतनी गंभीर थी कि डोनाल्ड ट्रम्प, अमेरिकी राष्ट्रपति ने सीधे कैलिफ़ोर्निया और हवाई के निवासियों को सावधान रहने का आदेश दिया। यहाँ तक कि क्रिस्टी नोम, घरगुले सुरक्षा विभाग की मंत्री, ने बाद में पुष्टि की कि अमेरिका के लिए खतरा तो टल गया, लेकिन असर अभी भी महसूस हो रहा था।
भूकंप की गहराई समुद्र तल से मात्र 19.3 किलोमीटर नीचे थी, जो धरती के इस हिस्से में काफी ऊपर मानी जाती है। सेवरो-कुरिल्स्क नामक एक छोटे से रिक्ते में 4 मीटर उंची लहरें आए, जिससे कई इमारतें क्षतिग्रस्त हुईं। जापान में हालात कुछ और ही थे। वहां की मौसम विभाग ने बताया कि इशिनुमाकी हार्बर में 50 सेंटीमीटर की लहर सबसे ज्यादा दर्ज की गई। यह सुनामी का पहला चरण था, लेकिन डर था कि 3 घंटे के भीतर 3 मीटर तक की लहरें छेड़ सकती हैं।
यही कारण था कि चीले, न्यूजीलैंड और फिलिपींस समेत कई देशों में अलर्ट जारी किया गया। लोग घरों से बाहर नहीं निकल रहे थे, और पोर्ट ऑपरेटर्स ने जहाजों को खुले पानी में भेजा।
2011 के उस दिन की यादगारें अभी ताज़ा हैं, इसलिए जापान की प्रतिक्रिया तेज़ थी। फुकushima Atomic Power Plant को सावधानी के लिए बंद कर दिया गया। ये लोग जानते थे कि ऐसी किसी भी भूकंप की लहर से पुरानी क्षति फिर से सक्रिय हो सकती है।
"ऐसे प्रभाव वाले भूकंप आम तौर पर कई क्षेत्रों तक फैल जाते हैं," Disaster Expert डॉ. विनोद शर्मा ने कहा।
डॉ. शर्मा ने समझाया कि 8.8 मैग्नीट्यूड कोई मामूली बात नहीं है। उनकी मानने को भारत ने 1897 में असाम सीमा पर 8.7 मैग्नीट्यूड का झटका महसूस किया था, जो उस समय का सबसे बड़ा दस्तावेजीकरण था। वे कहते हैं कि रिंग ऑफ फायर नामक क्षेत्र में टेक्टोनिक प्लेट्स एक दूसरे के ऊपर सर रही हैं, यही असली कारण है।
अमेरिकी भूवैज्ञान सर्वेक्षण (USGS) ने अपनी सूचना में हरी सिफारिश जारी की, जिसका मतलब है कि मौतों या भारी आर्थिक नुकसान की संभावना कम है। फिर भी, युकुरील द्वीपसमुच्चय जैसे क्षेत्रों में लगातार भूकंपीय गतिविधि देखी जा रही है।
खुलासा होने वाली रिपोर्ट बताती हैं कि जनवरी 2026 तक भी इसी क्षेत्र में भूकंप के झटके दर्ज किए गए। अगर ये पैटर्न जारी रहे, तो तटीय नगरों को निर्वेशन योजनाएं बनानी पड़ेंगी। सरकारों के पास प्रणालियां अच्छी हैं, लेकिन प्रकृति के सामने हमेशा एक चिंता बनी रहती है।
वर्तमान में भारतीय तटों के लिए कोई सीधा सुनामी अलर्ट नहीं है। भूकंप का केंद्र दक्षिणी अरबी और प्रशांत में है, जिससे भारतीय पश्चिमी और पूर्वी तट पर प्रभाव बहुत कम अनुमानित है।
कैम्चाटका रूस के पूर्व में स्थित एक प्रायद्वीप है। यह विश्व के सबसे अधिक सक्रिय भूकंपीय क्षेत्रों में से एक है क्योंकि यह यूरेसिया और प्रशांत प्लेट का मिलन बिंदु है।
सावधानी के तहत फुकुशिमा प्लांट को खाली कर दिया गया है। 2011 के दुर्घटना के बाद से वहां के प्रोटोकॉल बहुत सख्त हैं, इसलिए वर्तमान स्वरूप में कोई रेडिएशन लीकेज का कोई रिपोर्ट नहीं है।
यह भूकंप 8.8 मैग्नीट्यूड का मापा गया, जो कि 2011 के जापान के भूकंप से भी थोड़ा अधिक शक्तिशाली है। यह 19.3 किलोमीटर की गहराई पर हुआ, जो सतह के काफी करीब है।