इंदौर के नगर निगम ने 2025-26 के लिए अपना बजट पेश कर दिया है, और सबसे बड़ी बात यह है कि आम नागरिकों पर कोई नया टैक्स नहीं लगाया गया है। पुष्यमित्र भार्गव, मेयर of इंदौर नगर निगम ने गुरुवार को इस बजट की घोषणा करते हुए कहा कि शहर की वित्तीय स्थिति इतनी मजबूत है कि लोगों पर अतिरिक्त बремя डालने की जरूरत नहीं पड़ी। यह बजट सिर्फ एक कागजी काम नहीं है, बल्कि यह शहर के विकास की दिशा को तय करता है।
बजट सत्र के दौरान एक बड़ी बात सामने आई जो शहर के प्रशासनिक ढांचे को लेकर है। वरिष्ठ नेता कैलाश विजयवर्गीय ने इंदौर की वित्तीय स्वतंत्रता की तारीफ की। उन्होंने नोट किया कि राज्य के अन्य शहरी निकायों को कर्मचारियों के वेतन देने के लिए भोपाल से धन की मांग करनी पड़ती है, लेकिन इंदौर खुद को खुद चला पा रहा है। यह एक बड़ी बात है, क्योंकि यह दिखाता है कि शहर का प्रशासन अपने पैरों पर खड़ा है।
मेयर भार्गव ने 100 करोड़ रुपये के नकली बिल घोटाले का जिक्र भी किया। उनका कहना था कि इस मामले में शामिल लोग जेल में हैं और अब वसूली की प्रक्रिया जांच एजेंसियों के जरिए चल रही है। यह स्पष्ट संकेत है कि नगर निगम भ्रष्टाचार के खिलाफ कठोर रुख अपना रहा है।
प्रशासनिक कामकाज को पारदर्शी बनाने के लिए नगर निगम अपना खुद का डिजिटल पोर्टल लॉन्च करेगा। यह सिर्फ एक वेबसाइट नहीं होगी, बल्कि एक ऐसा सिस्टम होगा जहाँ काम की गति और स्पष्टता सुनिश्चित होगी। सबसे रोचक प्रोजेक्ट कचरा व्यवस्थापन का है। नगर निगम 'जोमैटो' जैसा सिस्टम लागू करेगा, जहाँ नागरिक अपने घर से मोबाइल ऐप के जरिए कचरा वहन वाहन बुक कर सकेंगे।
बुनियादी ढांचे के लिए भी बड़े पैमाने पर पैसा खर्च किया जाएगा। नगर निगम के नए भवन के निर्माण के लिए 350 करोड़ रुपये का लोन लिया जाएगा। इसी बजट में शहर में 39 फीट ऊंची स्वामी विवेकानंद की मूर्ति लगाने की योजना है, जो युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी। ट्रैफिक की भीड़ को कम करने के लिए 28 प्रमुख इंटरेक्शन पर बाएं मोड़ को चौड़ा किया जाएगा।
बजट की सबसे महत्वपूर्ण बात नए जोड़े गए 29 गांवों के विकास से जुड़ी है। ये गांव नगर निगम की सीमाओं में शामिल हो चुके हैं और इन्हें 10 वार्डों में बांटा गया है। वार्ड नंबर 15, 16, 18, 19, 35, 36, 75, 76, 77 और 79 को विशेष ध्यान दिया गया है। मेयर भार्गव ने इन गांवों के लिए सामान्य वार्डों की तुलना में तीन गुना बजट आवंटित किया है।
कुल मिलाकर 80 करोड़ रुपये इन 29 गांवों के विकास के लिए रखे गए हैं। इसमें सड़कों, पेयजल, नाली, स्ट्रीट लाइट और सीवर लाइनों का काम शामिल है। नवंबर 2022 में बनाए गए एक समिति को संशोधित कर अब इसमें कॉर्पोरेटर्स और शहर की योजना में जानदार लोगों को शामिल किया जाएगा। नगर निगम का दावा है कि एक साल के भीतर इन गांवों का रूप बदल जाएगा।
बजट केवल कागज पर नहीं रुकना चाहिए। अब देखने की बात यह है कि यह बजट विभागों तक कितनी तेजी से पहुंचता है। पिछले वर्षों में अधिकारियों ने करोड़ों का बजट बनाया, लेकिन सही योजना की कमी से आम जनता को बेसिक सुविधाएं नहीं मिल पाईं। इस बार मेयर ने सीधे तौर पर इस चुनौती को संबोधित किया है। हावर्स जोन के विकास के लिए 15 करोड़ रुपये और धर रोड-चंदन नगर-एयरपोर्ट को जोड़ने के लिए पुल का निर्माण भी शामिल है।
यह बजट इंदौर के लिए एक नए युग की शुरुआत हो सकता है। यदि डिजिटल पोर्टल और गांवों के विकास के वादे पूरे हुए, तो यह शहर के लिए एक मिसाल बन सकता है।
नहीं, मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने स्पष्ट किया है कि इस बजट में न तो कोई नया टैक्स लगाया गया है और न ही मौजूदा टैक्स में वृद्धि की गई है। यह नागरिकों के लिए राहत की खबर है।
नगर निगम ने 29 गांवों के लिए कुल 80 करोड़ रुपये का बजट रखे हैं, जो सामान्य वार्डों की तुलना में तीन गुना अधिक है। इसमें सड़क और पानी जैसे बुनियादी काम शामिल हैं।
नगर निगम 'जोमैटो' के मॉडल पर डिजिटल सिस्टम लाएगा। नागरिक अपने मोबाइल ऐप के जरिए कचरा वहन वाहन बुक कर सकेंगे, जिससे प्रक्रिया पारदर्शी होगी।
नकली बिल घोटाले में शामिल लोग जेल में हैं। नगर निगम जांच एजेंसियों के जरिए इस राशि की वसूली की प्रक्रिया शुरू कर रहा है।