जब आर्यमन सेठी, अर्चना पुरन सिंह के बेटे, ने अपने व्लॉग में अपनी जिंदगी का वह अध्याय खोला, तो हर कोई हैरान रह गया। एक तरफ जहां वे भारत के सबसे प्रतिभावान युवा फुटबॉल खिलाड़ियों में गिने जाते थे, वहीं दूसरी तरफ उनकी लड़ाई थी गंभीर मानसिक संघर्ष से। यह सिर्फ एक खेल की कहानी नहीं है, बल्कि एक ऐसे किशोर की यात्रा है जिसने सपनों के टूटने के बाद खुद को फिर से ढूंढना सीखा।

आर्यमन ने हाल ही में अपने YouTube चैनल पर एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें उन्होंने बिना किसी छिपाव के बताया कि कैसे उन्होंने 14 साल की उम्र में घर छोड़कर इंग्लैंड जाने का फैसला किया और उस दौरान उन्हें किस तरह के चुनौतियों का सामना करना पड़ा। इस वीडियो में उनका परिवार, विशेष रूप से उनके माता-पिता अर्चना पुरन सिंह और परमीत सेठी, भी मौजूद हैं, जो इस यात्रा के हर मोड़ पर उनके साथ रहे।

फुटबॉल का स्वर्णिम दौर: भारत से लेकर यूरोप तक

आर्यमन की शुरुआत बहुत ही दृढ़ता से हुई थी। उनके पिता परमीत सेठी ने उन्हें एक 'मशीन' की तरह तैयार किया था। आर्यमन के अनुसार, मात्र चार महीने की कड़ी मेहनत के बाद वे महाराष्ट्र के अंडर-13 टीम में दूसरे सबसे तेज खिलाड़ी बन गए। यह उपलब्धि किसी कमाल से कम नहीं थी।

उनकी यात्रा यहीं थमी नहीं। आर्यमन ने महाराष्ट्र के लिए खेलने के बाद भारतीय राष्ट्रीय टीम में अपनी जगह बना ली। एक यादगार मैच में, जो ईरान में खेला गया था, भारत बनाम पाकिस्तान के मुकाबले में आर्यमन ने चार गोल दागे। यह क्षण उनके करियर की चोटी थी। कोच द्वारा भेजी गई बधाई का फोन आज भी उनके दिल को छू जाता है। इसके बाद, उनकी माँ अर्चना पुरन सिंह ने उन्हें इंग्लैंड के प्रसिद्ध क्लब क्वींस पार्क रेंजर्स (QPR) के लिए ट्रायल दिलवाया। सपना साकार होने वाला था।

इंग्लैंड में टूटा सपना और चोट का दर्द

लेकिन किस्मत का रुख बदल गया। जब आर्यमन मात्र 14 साल की उम्र में घर छोड़कर इंग्लैंड पहुंचे, तो सबसे बड़ी चुनौती अकेलापन था। लेकिन असली झटका तब लगा जब वे वहां बसने ही वाले थे कि उनका पैर टूट गया। यह एक साधारण चोट नहीं थी; यह उनके सपनों के लिए एक बड़ी बाधा थी।

वे केवल तीन हफ्ते ही इंग्लैंड में रह सके। भारत लौटने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, बैसाखियां दी गईं और सर्जरी हुई। चोट के बावजूद, अगले साल जब वे फिर से इंग्लैंड गए, तो वे दसवीं कक्षा में थे। अब उन्हें पढ़ाई और खेल दोनों पर ध्यान देना था। सर्जरी से ठीक हो रहे समय में, वे अपने आस-पास के तेज और मजबूत हो रहे साथियों के मुकाबले पीछे छूट रहे थे। लंदन, जो पहले सपनों का शहर लगता था, अब उनके लिए कठिन और दुश्मन दिखने लगा।

मानसिक संघर्ष: डिप्रेशन और एंग्जायटी

मानसिक संघर्ष: डिप्रेशन और एंग्जायटी

जैसे-जैसे उनके फुटबॉल के सपने टूटे, आर्यमन के मन में गहरा डिप्रेशन घिर आया। उन्होंने वीडियो में बताया कि उन्हें पैनिक अटैक और एंग्जायटी अटैक आने लगे। उनके हाथ कांपने लगे। स्थिति इतनी गंभीर थी कि वे अपने कमरे से बाहर तक नहीं निकलते थे और पूरा दिन बिस्तर पर लेटे रहते थे। यह एक ऐसा चरण था जिसमें मानसिक स्वास्थ्य का महत्व समझने की जरूरत होती है। आर्यमन का अनुभव हमें बताता है कि शारीरिक चोट के साथ-साथ मानसिक टूटन कितना दर्दनाक हो सकता है।

दिल्ली ट्रिप: चटपटे स्वाद और अनोखी पहचान

हाल ही में, आर्यमन और उनका परिवार दिल्ली की यात्रा पर निकला। दिल्ली की सड़कों पर वे विभिन्न प्रसिद्ध चाट की दुकानों का दौरा करने गए। अर्चना और परमीत ने मज़ाक में कहा कि आर्यमन को कार से बाहर भेजा जाए क्योंकि उन्हें कोई नहीं पहचानेगा। लेकिन जैसे ही आर्यमन कमला नगर के रेस्टोरेंट की ओर बढ़े, भीड़ ने उन्हें घेर लिया और उन्हें थप्पड़ भी पड़े। दूसरे रेस्टोरेंट में, दुकानदार ने उन्हें तुरंत पहचान लिया और कुछ फैंस ने उनके साथ सेल्फी ली। यह अनुभव दिखाता है कि कैसे एक पूर्व खिलाड़ी की पहचान अभी भी लोगों के बीच जीवित है।

भविष्य की राह: नए सपने और नई ऊंचाइयां

भविष्य की राह: नए सपने और नई ऊंचाइयां

आर्यमन की कहानी अब केवल फुटबॉल की नहीं रही। यह एक ऐसे व्यक्ति की कहानी है जिसने संघर्ष के बाद भी जीवन को अपनाना सीखा है। वे अब अपने अनुभवों को शेयर कर रहे हैं, ताकि अन्य युवाओं को पता चल सके कि मानसिक स्वास्थ्य कितना महत्वपूर्ण है। अर्चना पुरन सिंह और परमीत सेठी का समर्थन इस यात्रा में उनके लिए आधार रहा है। आर्यमन अब नए सपने देख रहे हैं, नए लक्ष्य बना रहे हैं।

Frequently Asked Questions

आर्यमन सेठी ने फुटबॉल क्यों छोड़ दिया?

आर्यमन सेठी ने फुटबॉल इसलिए नहीं छोड़ा कि वे चाहते थे, बल्कि एक गंभीर चोट के कारण। इंग्लैंड में उनके पैर की हड्डी टूट गई, जिससे उन्हें सर्जरी करनी पड़ी और लंबे समय तक रिहैबिलिटेशन में गुजरना पड़ा। इस चोट के बाद वे अपने पूर्व स्तर पर वापस नहीं आ पाए, जिससे उनके करियर पर गहरा प्रभाव पड़ा।

आर्यमन सेठी को डिप्रेशन क्यों हुआ?

आर्यमन को डिप्रेशन इसलिए हुआ क्योंकि उनका फुटबॉल का सपना टूट गया था। इंग्लैंड में अकेलेपन, चोट के दर्द और अपने साथियों के मुकाबले पीछे छूटने का अनुभव ने उन्हें मानसिक रूप से कमजोर कर दिया। पैनिक अटैक और एंग्जायटी के कारण वे अपने कमरे से बाहर नहीं निकल पाते थे।

आर्यमन सेठी की फुटबॉल की उपलब्धियां क्या थीं?

आर्यमन सेठी ने महाराष्ट्र के अंडर-13 टीम में दूसरे सबसे तेज खिलाड़ी के रूप में नाम बनाया था। उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय टीम के लिए भी खेला था और ईरान में भारत बनाम पाकिस्तान के मैच में चार गोल दागे थे। इसके बाद उन्हें इंग्लैंड के क्वींस पार्क रेंजर्स क्लब के लिए ट्रायल मिलता था।

अर्चना पुरन सिंह और परमीत सेठी का आर्यमन के जीवन में क्या योगदान है?

अर्चना पुरन सिंह और परमीत सेठी ने आर्यमन के फुटबॉल करियर को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। परमीत सेठी ने उन्हें कड़ी मेहनत सिखाई, जबकि अर्चना पुरन सिंह ने उन्हें इंग्लैंड के प्रसिद्ध क्लब QPR के लिए ट्रायल दिलवाया। चोट के बाद भी, उन्होंने आर्यमन के मानसिक स्वास्थ्य और पुनर्वास में समर्थन प्रदान किया।

आर्यमन सेठी की दिल्ली ट्रिप में क्या खास हुआ?

आर्यमन सेठी की दिल्ली ट्रिप में वे कमला नगर, बंगाली मार्केट और ग्रेटर कैलाश की प्रसिद्ध चाट दुकानों पर गए। हालांकि अर्चना और परमीत ने कहा था कि उन्हें कोई नहीं पहचानेगा, लेकिन भीड़ ने उन्हें घेर लिया और कुछ फैंस ने उनके साथ सेल्फी ली। इस दौरान उन्हें थप्पड़ भी पड़े, जो एक रोमांचक अनुभव था।

श्रेणियाँ

टैग