क्या आप इस साल ईद-उल-अजहा के लिए तैयार हैं? ईद-उल-अजहा यानी बकरीद सिर्फ एक धार्मिक रिवाज़ नहीं, बल्कि दान, साझा करने और परिवार के साथ जुड़ने का मौका है। तारीख़ चाँद की निशानी से तय होती है, इसलिए हर साल बदलती है — अपनी स्थानीय मस्जिद या अधिकारिक हाई-कमेटी के ऐलान पर भरोसा करें।
ईद-उल-अजहा इस्लामी हिजरी कैलेंडर के ज़ु अल-हिज्जा महीने में मनाई जाती है। चाँद दिखने पर ही त्योहार की तारीख़ फाइनल होती है। देश-विशेष और मुस्लिम समुदायों में अलग-अलग देशों के चाँद देखते ही तारीख बदल सकती है, इसलिए स्थानीय घोषणा पर ध्यान दें।
तारीख की अनिश्चितता के बीच प्लानिंग आसान बनाना चाहिए — यात्रा टिकट जल्दी बुक न करें, और कुर्बानी के पशु या स्लॉटर हाउस की बुकिंग समय पर कर लें। कई शहरों में सरकारी या धार्मिक समिति संचालित नजायज़ स्लॉटर हाउस होते हैं — वे स्वच्छता और नियमों का ध्यान रखते हैं।
कुर्बानी का मूल मकसद हक बांटना और जरूरतमंदों तक तक़सीम करना है। जानवर स्वस्थ होना चाहिए और धार्मिक मानकों के अनुसार ही काटा जाना चाहिए। अगर आप घर पर कुर्बानी कर रहे हैं तो पहले से अनुमति और स्थानीय नियम पढ़ लें — कुछ जगहों पर सार्वजनिक स्वास्थ्य और कचरा प्रबंधन के कारण केवल नियत स्थानों पर ही काटने की इजाज़त होती है।
सुरक्षा टिप्स: तेज़ चाकू और साफ़ उपकरण इस्तेमाल करें, रबर-दरवाज़े वाले दस्ताने लगाएं, रक्त और अवशेषों का ठोस निपटान स्थानीय नियमों के मुताबिक करें। बच्चों को काटने-वाले क्षेत्रों से दूर रखें। अगर कोई संदेह हो तो प्रोफेशनल स्लॉटर हाउस चुनना बेहतर है।
मांस बाँटने का सरल तरीका अपनाएँ: 1/3 घर में रखें, 1/3 रिश्तेदार और पड़ोसियों को दें, 1/3 जरूरतमंदों या स्थानीय राशन केंद्रों को दान करें। इससे आप नियमों का पालन कर पाएंगे और समुदाय में समता बनी रहेगी।
त्योहार के दिन नमाज़ के पहले तैयारी रखें — मस्जिद समय, पार्किंग और ट्रैफिक के इंतज़ाम बदलते हैं। भीड़ से बचने के लिए परिवार के साथ जल्दी निकलें, मास्क और हैंड सैनिटाइज़र रखें। बड़े शहरों में ईद के बाद बाजार और सड़कें भी अधिक व्यस्त होती हैं—योजना बनाकर वापस आएँ।
छोटा बजट? सामूहिक कुर्बानी से खर्च घटाएं और हिस्सेदारी से अधिक लोग लाभान्वित होते हैं। बच्चों को त्योहार के मतलब समझाएँ—दान और साझेदारी पर ज़ोर दें।
ईद-उल-अजहा का असली मकसद इंसानियत और सहयोग है। संगठित तैयारी, सुरक्षा पर ध्यान और जरूरतमंदों के साथ बांटना—ये चार बातें मान लें तो त्योहार सुकून से गुज़रेगा।
ईद-उल-अजहा के अवसर पर, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) 17 जून को बंद रहेंगे। इस दिन सभी प्रकार के व्यापारिक गतिविधियां बंद रहेंगी। 18 जून को सामान्य व्यापारिक गतिविधियाँ फिर से शुरू होंगी। 14 जून को भारतीय बाजारों में नया उच्चतम स्तर देखा गया।