आत्महत्या: संकेत, संकट में वो कदम जो फौरन मदद कर सकते हैं

जब कोई आत्महत्या के बारे में सोचता है, तो अक्सर वह अंदर ही अंदर चुप रहता है। कई बार नज़दीकी लोग भी संकेत नहीं पहचान पाते। अगर आप चिंतित हैं या खुद को ऐसे विचार आ रहे हैं, तो यह पृष्ठ तुरन्त और व्यावहारिक कदम बताएगा — बिना जटिल बातें किये।

किस तरह पहचानें संकेत

हर किसी का व्यवहार अलग होता है, लेकिन कुछ आम संकेत होते हैं: अचानक बहुत उदास, आशा खोना, भविष्य की योजना न बनाना, निजी सामान बांटना, अचानक खर्चों या किन्हीं जिम्मेदारियों से खुद को अलग करना, शराब या नशीले पदार्थों का ज़्यादा इस्तेमाल। कभी-कभी लोग सीधे संकेत दे देते हैं जैसे "मैं और नहीं सह सकता" या "सब बेहतर होगा अगर मैं नहीं रहा"। ऐसे शब्दों को हल्के में न लें।

याद रखें: एक छोटा बदलाव भी बड़ा संकेत हो सकता है — नींद में गड़बड़ी, भूख में कमी, काम से दूर रहना। बच्चों या किशोरों में अधिक चुप्पी, गिरती पढ़ाई या अचानक हिंसक व्यवहार भी चेतावनी है।

अगर कोई व्यक्ति संकट में है — क्या करें

सबसे पहले शांत रहें और सुनें। सवाल पूछें: "तुम्हें कैसा लग रहा है?" या "क्या तुम मुझसे कुछ शेयर करना चाहोगे?" आरोप मत लगाइए। सुनने से व्यक्ति को लगेगा कि वह अकेला नहीं है।

जब किसी ने खुदकुशी की बात की हो तो उसे ना टालें और ना ही लज्जित करें। सीधे पूछना कि "क्या तुम खुद को नुकसान पहुँचाने वाले हो?" असमर्थन नहीं बल्कि मदद का पहला कदम है। अगर जवाब हाँ में हो, तो उसे अकेला न छोड़ें और तुरंत सहायता ढूँढें।

फौरन कदम: 1) व्यक्ति को शांत जगह पर रखें, 2) खतरनाक वस्तुएं और नशीले पदार्थ दूर कर दें, 3) नज़दीकी भरोसेमंद रिश्तेदार या दोस्त को बुलाएँ, 4) अगर खतरा तुरंत है तो स्थानीय आपात नंबर 112 पर कॉल करें।

प्रोफेशनल मदद लें: मानसिक स्वास्थ्य पेशेवर, क्लिनिक या अस्पताल से संपर्क करें। भारत में सरकारी और गैर-सरकारी हेल्पलाइन उपलब्ध हैं — अगर आप सुनिश्चित नहीं हैं तो स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र से मदद मांगे। टेलीकाउंसलिंग और आपात काउंसलर भी उपलब्ध हैं।

खुद मदद चाह रहे हैं? किसी पर भरोसा करें और अपनी बात बोलें। छोटे कदम जैसे हर दिन किसी से बात करना, नींद और खाने का ध्यान रखना, और प्रोफेशनल से मिलने का समय तय करना मददगार होते हैं।

याद रखें, मदद मांगना कमजोरी नहीं है। जो लोग इस दर्द से उबर चुके हैं, वे अक्सर कहते हैं कि एक छोटी सी बात ने उनकी ज़िन्दगी बदल दी। अगर आप किसी की मदद कर रहे हैं, तो धैर्य रखें और लगातार संपर्क में रहें।

अगर आप अभी खतरे में हैं तो फौरन स्थानीय आपात सेवा 112 पर कॉल करें या निकटतम अस्पताल जाएँ। अगर संभव हो तो किसी भरोसेमंद व्यक्ति के साथ रहें और पेशेवर समर्थन प्राप्त करें। आप अकेले नहीं हैं — मदद मिलती है और बेहतर होना संभव है।

बेंगलुरु के टेक इंजीनियर अतुल सुभाष की आत्महत्या: परिवार का उत्पीड़न और न्याय का संघर्ष

बेंगलुरु के 34 वर्षीय अतुल सुभाष की आत्महत्या के मामले में उनकी पत्नी निकिता सिंघानिया और उनके परिवार पर गंभीर आरोप लगे हैं। अतुल ने 24 पन्नों के सुसाइड नोट और 80 मिनट का वीडियो छोड़कर उत्पीड़न का विवरण दिया है। भाई बिकास कुमार ने आरोप लगाए कि निकिता और उसके परिवार ने आत्महत्या के लिए उकसाया। पुलिस ने मामले की छानबीन शुरू की है।

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